भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c9.51
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c9.51
- Language
- Hindi
c9.51
जितने लेख अब तक इस लिपि के मिले७ हैं उनसे पाया जाता है कि इसमें स्वरों तथा उनकी मात्राओं में ह्रस्व दीर्घ का भेद न था. संयुक्ताक्षर केवल थोड़े ही मिलते हैं इतना ही नहीं, किंतु उनमें से कितने एक में संयुक्त व्यंजनों के अलग अलग रूप स्पष्ट नहीं पाये जाते परंतु एक विलक्षण ही रूप मिलता है जिससे कितने एक संयुक्ताक्षरों का पढ़ना अभी तक संशययुक्त ही है. बौद्धों के प्राकृत पुस्तक८, जिनमें स्वरों के ह्रस्व दीर्घ का विशेष भेद नहीं रहता था और जिनमें संयु- काक्षरों का प्रयोग विरला ही होता था, इसमें लिखे हुए मिले हैं, परंतु यह लिपि संस्कृत ग्रंथों१ के लिखने के योग्य नहीं थी. शुद्धता और संपूर्णता के विचार से देखा जावे तो इसमें और ब्राह्मी में उतना