Hindu Administrative Institutions c6.35
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- English
c6.35
² सर्वोदण्डजितो लोको दुर्लभोहहि शुचिःकचित । दण्डभ्य हि भयात् कृत्स्नं जगत भोगाय कल्पते (7. 22.)
Hindu Administrative Institutions c6.35
² सर्वोदण्डजितो लोको दुर्लभोहहि शुचिःकचित । दण्डभ्य हि भयात् कृत्स्नं जगत भोगाय कल्पते (7. 22.)