Pracin Bharatiya Veshabhusha c10.s3.31
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c10.s3.31
- Language
- Hindi
c10.s3.31
मूर्ति की (आ० १०६) पृष्ठिका जो खाली बच गयी है फुल्लों से सजी है। मूर्ति का शिरोवस्त्र खूब सजा हुआ है । बाल दो लट्टूदार जूड़ों में सिर के अगल बगल में हैं। बालों को हटने बढ़ने न देने के लिए ललाट पर चौलड़ी मोती की बढ़ी है; जिसके दोनों अंत के फूँदने साफ दिखलायी देते हैं। ललाट के दोनों कोनों में समानान्तर रेखाओं में पत्र भंग हैं और ललाट के बीचोबीच तिलक, दाहिनी ओर लट्टूदार जूड़े पर कामदार पतली पट्टी बँधी हुई है। बायीं ओर का जूड़ा एक चार टिकरों वाले शिखाजाल से बँधा है। और जूड़ा एक सिरे से दूसरे सिरे तक, निम्नलिखित आकार के टीकरों से सजा है यथा—सब से निचला अंकुश है, उसके बाद वाला त्रिरत्न, जिस पर कोई आवरण है, उसके बाद परशु है, उसके बाद फिर त्रिरत्न है जिसपर कुलाहनुमा कोई आवरण है और फिर है गंडासा । इन सब के सिरों से मोती की लड़ें लगी हुई हैं। जूड़ों के बीच फुल्लों से सुसज्जित ढालनुमा गोल टिकरा है जिसका मतलब शायद चूड़ामणि से हो । कानों में गोल तकियां हैं जिन पर सितारों और फुल्लों का काम बना हुआ है, इनके नीचे मनकों या मोती की कई लड़ें लटक रही हैं। शरीर एक बिना बांह वाले और पैर तक लटकते हुए कंचुक से ढका है । यह कंचुक कमर पर पेटी से बंधा हुआ है । गले के नीचे किनारेदार गोल कालर है। कंचुक में एक विशेषता यह है कि दाहिना कंधा तो खुला है और कंचुक का किनारा बायें स्तन के मध्य से होकर जाता है। कंचुक की चूननें समानान्तर रेखाओं द्वारा दिखायी गयी हैं। कमर से जरा नीचे खिसकी हुई एक तीन लड़वाली करधनी है । लड़ें खारदार और गोल मनकों से बनी हैं। निचली लड़ से दो फुंदनेदार झुमके लटक रहे हैं। इन झुमकों के ऊपरी लड़ों में दोनों ओर दो कुंभांडों की बैठी हुई मूर्तियां हैं। छाती पर दाहिने कंधे से लेकर कटि तक एक पट्टी है जिसमें चार जंतर यथा दो मछलियां, एक चिड़िया जिसका सिर टूट गया है, एक सोती हिरनी और मकर हैं। इन जंतरों से मनकों की लड़ें लटक रही हैं। मूर्ति एक या उससे अधिक दुपट्टे पहने है जो दायें और बायें बाहुओं और बायें कन्धे और स्तन पर होते हुए घुटनों पर खतम होते हैं। उनके ठीक ठीक घुमावों का पता नहीं चलता। हर कलाइयों पर चार चार कंकण हैं।