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Pracin Bharatiya Veshabhusha c11.10

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c11.10

Language
Hindi

c11.10

कुषाण युग के साहित्य से उस युग की वेश-भूषा पर विशेष प्रकाश नहीं पड़ता। महावग्ग और चुल्लवग्ग ऐसे ग्रंथों का जिनमें ईसा के पूर्व चौथी या पांचवी शताब्दी के नर-नारियों की वेश-भूषा, पहनने के ढंग और कपड़ों का विशद वर्णन है, इस युग में अभाव ही सा है। इस युग के साहित्य में वेश-भूषा का छिटपुट वर्णन है, और वस्त्रों और कपड़ों का नाम बिना किसी भाष्य के आते हैं। इन शब्दों के अर्थ आधुनिक कोशों में भी नहीं मिलते और अगर मिलते भी हैं तो यह पता नहीं चलता कि वे वस्त्र सूती, रेशमी अथवा और किसी दूसरे रेशों से बनते थे । इस युग के कपड़ों का ज्ञान हमें "पेरिप्लस ऑफ दि एरिथ्रियन सी" नामक एक पुस्तक से, जिसे एक यूनानी नाविक ने ईसा की पहली शताब्दी में भूमध्य और हिंद-सागर के व्यापारिक संबंध पर लिखा था, मिलता है ।