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Pracin Bharatiya Veshabhusha c11.s8.8

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c11.s8.8

Language
Hindi

c11.s8.8

वालदार खुरदरे चमड़े अथवा भारी ऊनी कोट उत्तर पश्चिमी भारत से पूर्वी अफ्रिका को भेजे जाते थे। कावेरी पट्टन में भी ऊनी कपड़े बिकते थे। लातीनी में इस तरह की वस्तुओं को सामूहिक रूप से ‘केपिली इंडिकी’५० कहते थे। जांच पड़ताल से पता लगता है कि प्लीनी कथित चीनी लोहा, सूत और चमड़े वास्तव में चीन की पैदावार नहीं थे ये सब वस्तुएं भारतवर्ष की थीं जो पेरिप्लस के अनुसार खंभात की खाड़ी से हो कर सुमाली समुद्र तट के बंदरगाहों को जाती थीं५१। वार्मिंगटन के अनुसार सिंध नदी के बार्बरिकन बंदरगाह से जिन समूरों का निर्यात होता था उसमें कुछ तो मध्य एशिया के कौशेय पथ के सार्थवाहों द्वारा चीनी रेशम के साथ बलख होते हुए सिंध की ओर आते थे और कुछ तिब्बती समूर होते थे५२।