Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s2.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s2.1
- Language
- Hindi
c12.s2.1
कभी कभी खुले सिर पर जूड़े मोती की लड़ों और रत्नों से सजे होते थे ८, लेकिन बहुधा लोग जूड़े के ऊपर पगड़ी पहनते थे (आ० १३१-१३३)६ । पगड़ियों के संबंध में एक उल्लेख- नीय बात यह है कि वे सिर पर टोपी की तरह पहनी जाती थीं१०। एक दृश्य में जहां सिद्धार्थ हामिनिष्क्रमण के लिए उद्यत हैं सारथि छंदक उनकी बंधी पगड़ी हाथ में लिए है११। यह पगड़ी किसी फूले कपड़ी की बनी है और उसका एक छोर पंखे के आकार में है। पगड़ी के फेंटों के अस्त व्यस्त न होने देने के लिए उस पर एक शीर्षपट्ट भी लगा हुआ है। आज दिन भी पंजाब और अफगानिस्तान में इस तरह की पगड़ी बांधी जाती है।