Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s2.8
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s2.8
- Language
- Hindi
c12.s2.8
शीर्षपट्ट बहुधा अलंकृत होते थे। कलकत्ता म्यूजियम में जलालाबाद के पास से मिले एक शीर्षपट्ट पर चूमते हुए मिथुन का चित्र है (आ० १३४)१२। शीर्षपट्ट कभी कभी सुपर्ण द्वारा अपहृत नाग के चित्र से भी अलंकृत होता था (आ० १३५)१३। कभी कभी इस पर बुद्ध मूर्ति भी खचित होती है (आ० १३६)१४। कभी कभी गोल शीर्षपट्ट सिंहमुख से अलंकृत होता है१५। कभी कभी इसके आकार से मोर के फैली पूंछ का बोध होता है। मोर की छाती और पीठ के उतार चढ़ाव का उपयोग सुनार सुंदर अलंकार बनाने के लिए करते थे (आ० १३३)१६। पंखे ऐसे फैले ऊपरी छोर के नीचे पगड़ी की फेंटें सजायी जाती थीं। कभी कभी इसके तीन फेंटें होते थे१७ और इसकी सजावट फेंटों के अंदर से बीचो-बीच जाते हुए एक सिकुड़े कपड़े से और अधिक बढ़ जाती थी। शीर्षपट्ट का मिथुन से सुसज्जित आधार पगड़ी के बीचोबीच लगा हुआ है। रत्नों और गरुड़ मूर्तियों से खचित एक पट्टी ललाट के चारों ओर है। ये पट्टियां और अलंकार दो बंधनों से जिनके छोर पीछे हवा में फड़फड़ा रहे हैं बंधे हैं (आ० १३१)१८।