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Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s3.20

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s3.20

Language
Hindi

c12.s3.20

गंधार की मूर्तिकला में सेठ दाताओं को धोती, दुपट्टा और चादर पहने दिखाया गया है (आ० १४२)२४। यही पोशाक व्यापारियों२५ और गृहपतियों की भी थी२६। सरदी में वे कंचुक पहनते थे जिसके दाहिने२७ या बायें ओर२८ घुटनों के ऊपर एक कटाव होता था। एक चुस्त बाहों वाले लंबे कोट में गले से ले कर छाती के मध्य तक अथवा नाभि तक एक खड़ी पट्टी का मतलब शायद तुकमा-धुंडी की कतार से है२९। सहरी बहलोल से मिली एक दाता की मूर्ति एक चुस्त बाहों वाला कंचुक पहने है। चादर का एक कोना दाहिने कांख से निकाल कर बायें कंधे पर डाल दिया गया है जिससे छाती ढंक जाती है। वह एक चपकी टोपी भी पहने है (आ० १४३)३०। पुरुष शलवार भी पहनते थे जो इत्सिंग के अनुसार ईरान, तिब्बत, काशगर और तमाम तुर्किस्तान के पहरावे का एक अंग था। समूरी अस्तर वाला चोगा कभी कभी कंचुक के ऊपर पहन लिया जाता था (आ० १४४)३१