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Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s5.1

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s5.1

Language
Hindi

c12.s5.1

गंधार की मूर्तिकला में हमें शिकारी के दो बार दर्शन होते हैं (आ० १५१)३९। वह केवल धोती पहरे दिखाया गया है। खेतिहर (आ० १५२)४० अथवा मजदूर (आ० १५३)४१ केवल एक छोटी धोती अथवा लंगोटी पहनते थे। पहलवान भी लंगोट ही पहनते थे४२। दंगल के वक्त शाक्य पुरुष जांघिया पहनते थे (आ० १५४)४३। ब्राह्मण और ब्रह्मचारी धोती और बाएं कंधे से लटकती चादर पहनते थे। उनके बाल पीछे लटकते थे पर सिर पर बद्ध शिखा होती थी (आ० १५५)४४।