Pramāṇa · Search · About · API

Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s10.5

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s10.5

Language
Hindi

c13.s10.5

कपड़ों के भिन्न भिन्न नाम और दाम—कपड़ों के छ पर्यांयवाची यथा वस्त्र, आच्छादन, वास, चेल, वसन और अंशुक थे९२ । कीमती वस्त्रों के लिए सुचेलक और पट शब्द आए हैं और मामूली कपड़ों के लिए वरासि और स्थूल शाटक९३ । यहाँ यह बात गौर करने की है कि हल्के और नकली कलाबत्तू की बनी साड़ी को आज दिन भी बनारस में रासी माल कहते हैं जो संस्कृत वरासि का का रूपांतर मात्र है । लेकिन वैदिक साहित्य में वरासि के अर्थ वरस की छाल के रेशे से बना एक घटिया कपड़ा होता है९४ ।