Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s26.7
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s26.7
- Language
- Hindi
c13.s26.7
बृहत् कल्पसूत्र भाष्य के, जो भारत के सामाजिक इतिहास के लिए एक अभूत पूर्व ग्रन्थ है, एक खंड में साधुओं के वस्त्र पर तथा अविहित वस्त्रों के पहनने से पाप और उसके दूर करने प्रायश्चित्त संबंधी नियम हैं। आनुषंगिक रूप से इस खंड में नागरिकों की वेश भूषा का भी वर्णन आ गया है। इस ग्रंथ का सूत्र भाग निश्चय ही बहुत प्राचीन है और इसके रचयिता भद्रबाहु चन्द्रगुप्त मौर्य के समकालीन माने जाते हैं। इसका भाष्य जिनदास ने शायद छठी सदी में लिखा। इसमें ईसा की आरंभिक शताब्दियों के सामाजिक इतिहास का मसाला है पर अधिकतर मसाला गुप्त युग का है।