Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s30.23
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s30.23
- Language
- Hindi
c13.s30.23
काल कृत्स्न वस्त्र साल के कुछ महीनों में बहुत महंगे पड़ते थे और बहुत मुश्किल से मिलते थे। टीकाकार कहता है, जैसे गरमी में रक्त वस्त्र, जाड़े में चादरें (शिशिर प्रावरकादि) और वर्षा में केसरिया वस्त्र (वर्षासु कुंकुमखचितादि)१५७।