Pramāṇa · Search · About · API

Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s30.7

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s30.7

Language
Hindi

c13.s30.7

जैन साधुओं को शरीर स्पर्शी ऊनी कपड़े की इसलिए मनाही थी कि उनमें जू पैदा हो जाती थी और गर्द भी इकट्ठा हो जाती थी । लेकिन वे ऐसी ऊनी चादरें जिनके गंदे होने का भय नहीं था और जो शरीर को ठंडक से बचाती थीं पहन सकते थे१४८ । सूती धोती न मिलने पर जैन साधु तिरीट पट्ट और रेशम (कौशिकार) की बनी धोतियां पहन सकते थे । ऊनी चादर न मिलने पर छाल्टी की चादर ओढ़ने का आदेश है । उसके भी न मिलने पर रेशमी चादर और उसके भी न मिलने पर तिरीट पट्ट की चादर ओढ़ी जा सकती थी१४९ ।