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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s31.6

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s31.6

Language
Hindi

c13.s31.6

थी१६४। पर कुछ अवस्थाओं में इन वस्त्रों के किनारे (दशिका) रखे जा सकते थे। कुछ कमजोर किनारों वाले वस्त्रों में छोरों पर इसलिए किनारे जोड़ दिये जाते थे कि वे अधिक टिकाऊ बन सकें। ऐसे वस्त्रों में साधु किनारे रख सकते थे। कुछ देशों में वस्त्रों के किनारे पतले होते थे इनको भी ज्यों की त्यों रखने की आज्ञा थी१६५। इस संबंध में टीकाकार सिंधु का दृष्टांत देता है।