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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s36.3

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s36.3

Language
Hindi

c13.s36.3

थे । जूते बनाने के लिए बृहत् कल्पसूत्र में गाय, भैंसे, बकरे, भेड़ और दूसरे वन्यपशुओं के चमड़े गिनाये गये हैं१६३ । जैन साधु और साध्वियां किसी तरह के नापदार अथवा रंगीन चमड़े की वस्तुओं का व्यवहार नहीं कर सकते थे१६४ । इस उल्लेख से यह आशय निकाला जा सकता है कि उस युग में तरह तरह के नाप और शकल के तथा रंगीन चमड़ों से जूते बनते थे जिनकी जन साधारण में काफी मांग थी । प्रमाण और वर्ण के अनुसार इन्हें चार भागों में; यथा सकल कृत्स्न, प्रमाण कृत्स्न, वर्णं कृत्स्न और बंध कृत्स्न में बांट दिया गया है१६५ ।