Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s7.32
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s7.32
- Language
- Hindi
c13.s7.32
ख—अंशुक—बृहत् कल्पसूत्र भाष्य४० की टीका में इसे कोमल और चमकीला रेशमी कपड़ा कहा गया है । निशीथ४१ में इस शब्द की लंबी चौड़ी व्याख्या है—'अंसुयाणि कणगकंतानि, कणगखसियानि, कणगचित्ताणि, कणग विचित्ताणि' अर्थात् अंशुक में तारबाने का काम होता था, अलंकारों में जरदोजी (खचितानि) का काम तथा उसमें सोने के तार से चित्र विचित्र नकाशियां बनी होती थीं । उपरोक्त वर्णन से पता चलता है कि अंशुक किमखाव अथवा पोत जैसा कोई कपड़ा था । आचारांग में भी इसका उल्लेख है४२ ।