Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s19: सामंतों और उच्चवर्ण नागरिकों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s19
- Language
- Hindi
सामंतों और उच्चवर्ण नागरिकों की वेश-भूषा
c14.s19.1
राजाओं का पहरावा तो सादा होता था पर उनके मुकुट काफी कामदार और रत्न जटित होते थे । सामंतों और उच्च पदस्थ नागरिकों के पहरावे भी इसी तरह सादे होते थे, पर उनमें मुकुट का अभाव होता था । ऐसा लगता है कि मुकुट पहनने के अधिकारी केवल राजे ही थे । सादापन होते हुए भी सामंत अपने कपड़े खूब सजा कर पहनते थे । हम नीचे इन वस्त्रों के पहनने के भिन्न भिन्न तरीकों की समीक्षा करेंगे ।
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मीरपुर खास (सिंध) से मिले एक मिट्टी के अर्ध चित्र में गुप्त-युग के एक समृद्ध नागरिक की मूर्ति है (आ० ३३३)७६। उसने जांघिया के ऊपर धोती इस तरह से पहन रखी है कि उसका सामना तो घुटनों तक पहुंचता है पर पीछा एंड़ियों के जरा ऊपर । ढीले तौर से बंधे कमरबंद के दोनों मुक्त छोर बायीं ओर लटक रहे हैं। जांघिये के ऊपर धोती पहनने की इस युग में साधारण प्रथा थी । अजंटा की १७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में भी एक नागरिक जांघिया के ऊपर एक छोटी धोती पहरे दिखलाया गया है । बायीं ओर सफाई से बंधे पटके का छोर नीचे लटक रहा है । वैकक्ष्य के दोनों छोर छाती पर एक मोती के कांटे से फंसे हैं७७।
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७६ ए० एस० आई० एन० रि०, १९०९-१०, प्ले० ३८, बी०
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७७ हेरिंगम, वही, प्ले० ४१, ५५
c14.s19.5
ईडर रियासत के सामलाजी पहाड़ी से मिली एक बेसिर वाली शिव की मूर्ति में एक उच्च गुप्त नागरिक की वेश-भूषा अंकित है । धोती घुटनों के नीचे तक पहुंचती है और उसका चुना हुआ छोर सामने लटकता है । कमर पर बंटे हुए कमरबंद के तीन फंदे हैं। कमरबंद के चुने हुए छोर दोनों ओर देख पड़ते हैं (आ० ३३४)७८। ईडर से मिली एक दूसरी शिव की मूर्ति एंड़ी तक पहुंचती कमर पेटी से बंधी है तथा एक ढीला कमरबंद जांघों को घेरे है (आ० ३३५)७९। जोधपुर रियासत के मंडोर नामक स्थान से मिले एक स्तंभ पर गोवर्धन-धारी कृष्ण एंड़ी तक पहुंचती धोती पहने हैं। कमरपेटी में एक घुमावदार कमरबंद संकर मुट्ठी लगा कर दाहिनी ओर बंधा है (आ० ३३६)८०।
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७८ इनामदार, सम आर्किओलोजिकल फाइंडस् इन ईडर स्टेट, प्ले० १, १; अहमदाबाद, १९३६
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७९ वही, प्ले० २, ५
c14.s19.8
८० ए० एस० आई० एन० रि०, १९०५-०६, पृ० १३६
c14.s19.9
ग्वालियर रियासत के उदयगिरि के पांच नंबर के लेण में वराह अवतार के अर्ध चित्र में समुद्र की वेश-भूषा तत्कालीन भद्रपुरुष की सी है८१। धोती और कंधों को ढांकते दुपट्टे के सिवाय वह एक शीर्षपट्ट युक्त पगड़ी भी पहने है जो मथुरा की कुषाण मूर्तियों में आई पगड़ी का ध्यान दिलाती है । सारनाथ से मिली अवलोकितेश्वर की मूर्ति में हम धोती और
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८१ एन० रि० आर० डि० ग्वालियर स्टेट, १९२८-२९, प्ले० ५
c14.s19.19
कमरबंद पहनने के आकर्षक ढंग को देख सकते हैं। अवलोकितेश्वर के शरीर का निचला भाग एक चुनी धोती से, जिसकी चूंदन पैरों के बीच में लटकती है, ढंका है। कमर से यह धोती एक रत्न जटिल पेटी से बंधी है। कमर के ऊपर हम ढीले तरीके से बंधे एक रुमाल को देखते हैं जो दाहिनी बाहु के पास बंधा है और जिसके लहराते छोर दाहिने पैर के पास नीचे लटक रहे हैं (आ० ३३७)८२।
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८२ साहनी, केटलाग ऑफ दि म्यूजियम ऑफ आर्किपोलोजी एट सारनाथ, प्ले० १३ बी०, पृ० ११८
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१७ नं० की लेण में सारिपुत्रप्रश्न नामक एक भित्ति-चित्र में एक सामंत या राजा का जो उच्च पदाधिकारी बायीं ओर दिखलाया गया है, खड़ी धारियों वाली धोती और छाती को ढकती हुई चादर जो बायें कंधे पर डाल दी गयी है पहरे है। इसकी चक्करदार छोटी पगड़ी के एक तरफ सोने का फुल्ला लगा है (आ० ३३८)८३।
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८३ हेरिगम, वही, प्ले० ४२, ५६
c14.s19.23
सारनाथ से मिली सातवीं सदी के अंत की मंजुश्री की मूर्ति घुटने के नीचे तक पहुंचती धोती, जिसका एक भाग चुन कर बायीं ओर खूसा है, पहरे है। एक भारी करधनी कमर में है। कमरबंद का एक बटा हिस्सा एक चूड़ी से निकाल कर दाहिनी जांघ पर लटका दिया गया है (आ० ३३९)८४।
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८४ साहनी, वही, पृ० १२०-१२१, प्ले० १३ सी०