Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s30.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s30.5
- Language
- Hindi
c14.s30.5
देवगढ़ से मिली नंद-यशोदा की मूर्ति में यशोदा का पहरावा आजकल के बंजारों की पोशाक जैसा है। वह सिर को ढकती हुई एक चादर, भरी बांह का कुरता जिसके बायीं ओर घुंडी है और लहंगा पहने दिखलायी गयी हैं (आ० ३८४)१३२। यह वेश-भूषा भारतीय कला में सर्व-प्रथम प्रदर्शित की गयी है और बहुत सम्भव है कि जाट इस पहिरावे को पांचवीं या छठी शताब्दी में मध्य एशिया से यहां लाये। इतने दिन बीत जाने पर भी जाट, बंजारे लंबाडी इत्यादि इस पहिरावे को अपनाये हुए हैं।