Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s30: गुप्त-युग में रानियों और दूसरी स्त्रियों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s30
- Language
- Hindi
गुप्त-युग में रानियों और दूसरी स्त्रियों की वेश-भूषा
c14.s30.1
समुद्रगुप्त के साधारण भांति के सिक्कों के पट पर लक्ष्मी देवी एड़ी तक पहुंचती साड़ी और घुटने तक पहुंचता पूरे बांह का कंचुक पहनती हैं, स्तनों के नीचे एक पट्ट बंधा है जिसकी मुट्ठी बायीं ओर दिखलाई गयी है। उनके कंधे चादर से ढके हैं (आ० ३८१)१२९। धनुर्धारी भांति के सिक्कों में लक्ष्मी धोती और अचबहियां कुर्पासक पहने दिखलायी गयी हैं (आ० ३८२)१३०। कौसम से मिली एक गुप्तकालीन शिवपार्वती की मूर्ति में एक जालीदार टोपी, जिसके दोनों ओर फुल्ले हैं, पहने दिखलायी गयी है (आ० ३८३)१३१।
c14.s30.2
१२९ एलेन, वही, प्ले० १, १-९
c14.s30.3
१३० वही, प्ले० ७, १
c14.s30.4
१३१ ए० एस० आई० एन० रि०, १९१३-१४, प्ले० ७०, ६
c14.s30.5
देवगढ़ से मिली नंद-यशोदा की मूर्ति में यशोदा का पहरावा आजकल के बंजारों की पोशाक जैसा है। वह सिर को ढकती हुई एक चादर, भरी बांह का कुरता जिसके बायीं ओर घुंडी है और लहंगा पहने दिखलायी गयी हैं (आ० ३८४)१३२। यह वेश-भूषा भारतीय कला में सर्व-प्रथम प्रदर्शित की गयी है और बहुत सम्भव है कि जाट इस पहिरावे को पांचवीं या छठी शताब्दी में मध्य एशिया से यहां लाये। इतने दिन बीत जाने पर भी जाट, बंजारे लंबाडी इत्यादि इस पहिरावे को अपनाये हुए हैं।
c14.s30.6
१३२ डा० वासुदेवशरण अग्रवाल, गुप्त आर्ट, प्ले० १, ७, लखनऊ १९३९
c14.s30.7
अजंटा के भित्ति-चित्रों में रानियां एड़ी तक पहुंचती साड़ी या धारीदार घघरी पहनती हैं (आ० ३८५)१३३। दर्पण में अपना मुख देखती हुई एक राजकुमारी तीनलड़ी करधनी और सुनहरे किनारों वाले कमरबंद से बंधी साड़ी पहने है (आ० ३८६)१३४। उसकी एक सेविका पेटी से बंधी साड़ी पहने हुए है और उसके कमरबंद के छोर पीछे लटक रहे हैं। इसी चित्र में एक चामरग्राहिणी की साड़ी की सिलवटें बड़ी सुंदरता से बतायी गयी है। उसमें कमरबंद की मुट्ठी पीछे बंधी है। एक दूसरी जगह एक रानी धारीदार घघरी और टोपी अथवा पगड़ी पहने हैं (आ० ३८७)१३५।
c14.s30.8
१३३ हेरिंगम, वही, प्ले० ३, ४
c14.s30.9
१३४ वही, प्ले० ५, ६
c14.s30.10
१३५ वही, प्ले० २७, २९, केव १७
c14.s30.11
कभी कभी अजंटा के भित्ति-चित्रों में रानियां और कुलीन स्त्रियां सिले कपड़े भी
c14.s30.12
पहने दिखलायी गयी है । १ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक रानी महीन कपड़े की बनी बुंदकीदार चोली पहनती है१३६ । उसी लेण के पद्मपाणि वाले चित्र में एक राजकुमारी झीनी मलमल की चोली और१३७ एक छोटी घघरी जिसके खानों में पक्षी और सीढ़ियां बनी हैं और जिसके एक मध्य के खाने में लहरिया बनी है, पहने है। रानी के सिर पर कामदार टोपी अथवा मुकुट है (आ० ३८८)१३८। एक दूसरी जगह एक रानी हल्के रंग का कंचुक, जिसके किनारे पर जवाहिर बने हैं, पहने हैं(आ० ३८९)१३९ । १ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक चौकी पर बैठी रानी धारीदार घघरी स्तनपट्ट और चादर पहने है (आ० ३९०)१४०। उसी लेण के एक दूसरे चित्र में एक स्त्री धारीदार घघरी, जिसके ठीक बीच में फूलों से सजी एक गोट लगी है, पहने है (आ० ३९१)१४१। २ नं० की लेण के एक भित्ति चित्र में एक स्त्री महीन कपड़े की चोली और किनारेदार चंडातक पहने है (आ० ३९२)१४२।
c14.s30.13
१३६ याजदानी, वही, भा० १, प्ले० १७, पृ० २१
c14.s30.14
१३७ वही, प्ले० २४; हेरिंगम, वही, प्ले० ११, १३, चित्र में चोली नहीं दिखाई देती।
c14.s30.15
१३८ वही
c14.s30.16
१३९ याजदानी, वही, भा० १, प्ले० ६ बी०
c14.s30.17
१४० हेरिंगम, वही, प्ले० १४, १६
c14.s30.18
१४१ वही, प्ले० १५, १७
c14.s30.19
१४२ याजदानी, वही, भा० २, प्ले० २१, पृ० २०