Pramāṇa · Search · About · API

Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s33: ईरानी नस्ल की दासियां

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s33

Language
Hindi

ईरानी नस्ल की दासियां

c14.s33.1

१ नं० की लेण के एक मोज मजे के दृश्य में दाहिनी ओर खड़ी एक दासी अपने स्वामी को शराब पिला रही है। वह एक समूर के किननोरे वाली लाल टोपी, जिसकी चोटी में पर लगे हैं, पहरे हैं। उसका पूरे बांह का लंबा कंचुक लाल रंग का है और उसके गले, मोहरियों और

c14.s33.6

कंधों पर कसीदे का काम है। लंबे और सफेद घाघरे में हल्के नीले रंग की चुंननदार झालर लगी है (आ० ४०१)१५४। बायीं ओर की दासी का पहरावा कुछ थोड़े फरक के साथ वैसा ही है। इसकी लाल टोपी के साथ एक पीठ पर लहराता रुमाल लगा है जिसका एक सिरा कमर में खोंस दिया गया है। कंचुक के कंधों, मोहरियों और गले पर समूर लगा मालूम पड़ता है। लंबे घाघरे की चुनी झालरें हल्के हरे और नीले रंग की हैं (आ० ४०२) ईरानी सरदार के साथ बैठी हुई स्त्री की वेश-भूषा दासियों के वेश-भूषा सी ही है।

c14.s33.7

१५४ —याजदानी, वही, प्ले० ३९ ए०

c14.s33.8

१७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र के मध्य में एक दासी जो अपनी वेश-भूषा से विदेशी मालूम पड़ती है, फुल्लों से अलंकृत कंचुक तथा गोल टोपी, जिसके छज्जे ऊपर मुड़े हैं और जिसके चोटी पर कुब्बा है, पहने है१५५। उसी लेण के एक दूसरे चित्र में एक सेविका कंचुक और रुमाल, जिसके दोनों छोरों की गट्ठी गले पर लगी हैं, पहरे है (आ० ४०३)१५६। उसी चित्र में एक दूसरी दासी दो बगल में लगे हुए तस्मों वाली टोपी पहरे है (आ० ४०४)।

c14.s33.9

१५५ —हेरिंगम, वही, प्ले० २८, ३१

c14.s33.10

१५६ —मुकुल डे, अजंटा एण्ड बाग १४० पृ० के सामने लगा प्लेट

c14.s33.11

१७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक विदेशी दासी काही रंग की एक अवबहियां जाकेट पहने है जो कमर तक चपकी है और जिसका आगा और कोने खुले हुए हैं (आ० ४०५)१५७। जाकेट के कपड़ों पर चौफुलियों की नकाशी है। उसका लहंगा शायद धारीदार रेशमी कपड़े से बना है। उसकी खोंदनुमा टोपी के किनारे घुंडीदार हैं।

c14.s33.12

१५७ —हेरिंगम, वही, प्ले० ४५, प्ले० ७

c14.s33.13

२ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक स्त्री छोटे बांहों वाली नीले रेशमी कपड़े की बनी कसी चोली, जिसकी मोहरियों पर मोतियों की झालर है, पहने है१५८। दक्षिण में अब भी चोली की मुहरियों पर सोने के दानों की लड़ें लगाने की प्रथा है। उसी लेण के एक दूसरे चित्र में हम एक दासी के पहरावे में तीन कपड़े यथा, एक कसी चोली जिसके ऊपर शरीर के अंगों के सुगमता से संचालन के लिए बगलों में ऊपर से नीचे तक कटा हुआ सुंदर कंचुक है, तथा अंग सौष्ठव को दिखलाती एक साड़ी अथवा घघरी है (आ० ४०६)१५९। इसी लेण में एक दूसरी जगह हम इसी तरह के एप्रन से मिलने जुलते वस्त्र देख सकते हैं जो सफेद जमीन पर काले सितारों वाले कपड़े से बना है। इसमें शरीर की बगलें दिखलायी देती हैं१६०।

c14.s33.14

१५८ —याजदानी, वही, भा० २, प्ले० ७ पृ० ४

c14.s33.15

१५९ —वही, २ प्ले० १७ ए०

c14.s33.16

१६० —वही, २ प्ले० २५

c14.s33.17

१६ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में पंखा हांकने वाली स्त्री एक स्तनपट्ट और

c14.s33.18

घघरी पहने है (आ० ४०७) १६१। उसी दृश्य में मृतप्राय राजकुमारी के पास बैठी एक दासी अधवहियां जाकेट पहने है ।

c14.s33.19

१६१ हेरिंगम, वही, प्ले० ३५, ३८

c14.s33.20

१६ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक बैठी हुई दासी घुटनों तक पहुंचता कसा हुआ अधवहियां कंचुक पहने है (आ० ४०८) १६२। दवा तैयार करती हुई एक दूसरी दासी छाती को ढंकता हुआ और शायद और नीचे की ओर जाता हुआ अधवहियां कंचुक पहने है, पीछे का निचला भाग अनावृत मालूम पड़ता है (आ० ४०९) ।

c14.s33.21

१६२ मुकुल दे, वही

c14.s33.22

१७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक स्त्री पारदर्शी कपड़े की बनी घघरी और वंकक्ष्य पहने हुए उपवन में घूम रही है (आ० ४१०) १६३ ।

c14.s33.23

१६३ हेरिंगम, वही, प्ले० ३५, ३९

c14.s33.24

१७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में बुद्ध की सेवा में निरत एक स्त्री बिना कंधों और बांहों वाला धारीदार कंचुक और रत्न जटित छः पहलो टोपी पहने है (आ० ४११) १६४ उसी दृश्य में एक दूसरी स्त्री चौखूटी टोपी (आ० ४१२) और एक तीसरी स्त्री घाटदार (tiered) टोपी पहने हैं ।

c14.s33.25

१६४ वही, प्ले० ४२, ५६

c14.s33.26

अजंटा में एक जगह जमीन पर पीठ पीछे बैठी एक मध्यवर्ग की स्त्री एक नीचे काले और बिना बांह की चोली पहने है जिसका ऊपरी हिस्सा हरा, पीला, और नीला है और निचला हिस्सा धारीदार (आ० ४१३) १६५।

c14.s33.27

१६५ याजदानी, वही, १, प्ले० ११