Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.79
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.79
- Language
- Hindi
c4.79
से, मधुरा की मूर्तियों से और अमरावती और गोल्ली के अर्ध चित्रों से मिलती है। इस काल में उत्तर-पश्चिमी भारत में धोती, चादर, पगड़ी, साड़ी और ओढ़नी के सिवाय कंचुक, शलवार, टोपियां, जिरह-बख्तर और पूरे बूट प्रचलित थे, जैसे ईरानी और मध्य एशिया के पहरावे भी मिलते हैं। यहां हमें यूनानी वेश-भूषा के भी दर्शन मिलते हैं । शक राजाओं की पोशाकों का पता सिक्कों से चलता है। इस युग में दक्षिण भारत में स्त्रियों और पुरुषों की वेश-भूषा काफी सादी होती थी । दोनों ही मलमली कमरबन्द और धोतियां पहनते थे । पुरुष पगड़ी भी पहनते थे । सिपाही और द्वारपाल इत्यादि कंचुक पहनते थे और कभी-कभी उनके सिर पर कुलाहनुमा टोपी भी होती थी ।