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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.90

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.90

Language
Hindi

c4.90

इस युग के साहित्य में वेश-भूषा का कम उल्लेख है । साधारणतः लोग धोती दुपट्टा पहनते थे । काशी के धोती दुपट्टे प्रसिद्ध थे और कभी कभी इनके बड़े ऊंचे दाम होते थे । राजे चौड़े किनारे वाले नये वस्त्र पहनते थे । मामूली किसान सन की धोती और लंगोटी पहनते थे । पगड़ी पहनने की भी प्रथा थी । राजे कभी-कभी कंचुक भी पहनते थे । अंग रक्षक और सिपाही तो अक्सर कंचुक और जिरह-बख्तर पहनते थे। दक्षिणी राजे जड़ाऊ टोपी और धोती पहनते थे । उच्च वर्ग के तामिल धोती पहनते थे और एक टुकड़े कपड़े से अपने सिर ढंक लेते थे । अंग रक्षक कोट पहनते थे । यवन अंग रक्षक युद्ध क्षेत्र में कंचुक पहन कर पहरा देते थे ।