Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.8
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.8
- Language
- Hindi
c6.8
तो निश्चित जान पड़ता है कि आर्य भारतवर्ष में और पश्चिमी एशिया में एक साथ प्रविष्ट हुए और ईरानी और भारतीय आर्य करीब २५०० ई० पू० में अलग हुए। भारतीय आर्यों ने इस देश में २००० ई० पू० और १४०० के बीच अफगानिस्तान और हिंदूकूश के रास्ते से होकर प्रवेश किया और सबके पहले सिंध नदी की उपरली घाटी में बसे। बाद में उन्होंने धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए गंगा की घाटी में भू-स्थापना की और अंत में विध्यक्षेत्र और सुदूर दक्षिण में फैल गये। पशु पालन और कृषि इनके प्रधान व्यवसाय थे और आरंभिक काल में वे गांवों में रहते थे । गृह निर्माण, बड़ईगिरी और रथ बनाने की कला में वे पटु थे । अयस के बरतन बना सकते थे और सोने और गहनों के उपयोग वे करते थे । वे कपड़े भी बुन सकते थे। सीने पिरोने, चमड़े कमाने और मिट्टी के बरतन बनाने की कलाओं से भी वे परिचित थे ।