Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s12.6
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s12.6
- Language
- Hindi
c6.s12.6
गये वस्त्र दोनों ही के लिए हुआ है५४। सुवासस्५५ विशेषण का प्रयोग अच्छे कपड़े पहनने वालों के लिए हुआ है। सुरभि५६ शब्द से पता चलता है कि पहनने के कपड़े बदन पर ठीक बैठते थे। समाज में बढ़िया कपड़े पहनने वालों के मान होने का उल्लेख शतपथ५७ में आया है। इस उल्लेख के अनुसार मनुष्य कपड़ा इसलिए पहनता है कि वह उसके बदन पर चमड़े की तरह शरीर की रक्षा का काम देता है। इसीलिए यह आवश्यक है कि मन से मनुष्य अच्छे कपड़े पहने (सुवासा एव बुभूषेत्)। अनेक रंग विरंगे कपड़े पहनने की भी प्रथा थी। शतपथ में अग्नि का एक पर्याय विभावसु५८ भी है जिसका अर्थ है रंग बिरंगे कपड़े पहनने वाला। कौषीतकी ब्राह्मण५९ में अच्छे कपड़े पहनने वाले युवकों का उल्लेख है।