Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s2.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s2.5
- Language
- Hindi
c6.s2.5
शामुल्य के संबंध में डा० सुविमलचंद्र सरकार१० का और ही मत है। उनका विचार है कि शामुल्य रुई भरा कोई हल्का कपड़ा था। वे हमारा ध्यान इस ओर भी दिलाते हैं कि आधुनिक शमला जो एक संकरा शाल है, और जिसका व्यवहार पगड़ी पर के बंद के लिए होता है और जिसकी व्युत्पत्ति अरबी शामिलात से जिसके अर्थ होते हैं जोड़ना, वास्तव में शामुल्य से निकला है। इस धारणा को सत्य मानने में कई कठिनाइयां हैं। शामुल्य को रुई से भरा वस्त्र मानने में संदेह होता है क्योंकि रुई का ज्ञान, जैसा कि हम आगे चल कर देखेंगे, आर्यों को सूत्र काल में हुआ। शामुल्य तो समूर शब्द का प्राचीन रूप मात्र है जिसका अर्थ आज दिन भी रोएंदार चमड़ा होता है। इसी अर्थ में इस शब्द का व्यवहार कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी हुआ है।