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Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.2

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.2

Language
Hindi

c7.2

६४२ ई० पू० में ३२० ई० पू० तक का भारतीय इतिहास षोडश जनपदों शैशुनागों (६४२-४१३ ई० पू०) और नंदों (४१३-३२२ ई० पू०) का इतिहास है। शैशुनाग वंश में नवीन राजगृह की नींव डालने वाले बिंबिसार, श्रेणिक और कुणिक अजातशत्रु बुद्ध और महावीर के समकालीन थे। इस युग के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास की प्रचुर सामग्री हमें बौद्ध और जैन साहित्यों तथा धर्मसूत्रों, गृह्यसूत्रों और अष्टाध्यायी से प्राप्त है। इन सब ग्रंथों के कालनिर्णय में भी हमें उसी कठिनाई का सामना करना पड़ता है जिसे हमें वैदिक ग्रंथों के कालनिर्णय में। फिर भी उनके अध्ययन से हमें पता चलता है कि उनमें वर्णित राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्थाएं मौर्य युग से पूर्व की हैं। इस युग के ब्राह्मण, जैन, बौद्ध और व्याकरण शास्त्रों में उल्लिखित भारतीय संस्कृति का रूप करीब करीब एक सा है। इसलिए अगर हम इस युग की संस्कृति को षोडश महाजनपद युग की संस्कृति कहें तो इसमें कोई हरज नहीं है। श्रुत होने से इस युग के ग्रंथ बाद में इकट्ठे करके लिखे गये और संभव है कि बहुत सी बाद की बातों का भी उनमें समावेश हो गया हो, पर आधुनिक ग्रंथानुशीलन की परिपाटी को ध्यान में रखकर अगर हम इन ग्रंथों का अध्ययन करें तो पुराने को नये से अलग करने में हम समर्थ हो सकते हैं। इस बात को ध्यान में रख कर हमने बौद्ध और जैन ग्रंथों के उन्हीं अंशों को लिया है जो आलोचना की कसौटी पर खरे और प्राचीन उतरते हैं।