Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s18.6
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s18.6
- Language
- Hindi
c7.s18.6
जूते मनुष्य के पहिरावे में जूतों और पादुकाओं का एक विशेष स्थान होता था। एक जातक में कहा गया है कि शरीर की रक्षा और आराम के लिए जूतों का खरीदना आवश्यक था११०। जूते आकार और रंग में भिन्न भिन्न प्रकार के होते थे। जूते एकतल्ले (एक पलासिक), दोतल्ले (द्विपटल), तिनतल्ले (तिपटल) और चौतल्ले होते थे१११। जूते नील, लोहित, मंजीठ, कृष्ण, नारंगी (महारंग) और पीले (कुरुंदिय) चमड़ों से बनाये जाते थे । जूतों में रंग बिरंगे किनारे भी लगाये जाते थे११२। ऐसे रंग बिरंगे तथा अनेक तल्ले वाले जूते केवल गृहस्थ पहन सकते थे । भिक्षु केवल एक तल्ले जूते पहन सकते थे११३ लेकिन अनेक तल्ले वाले पुराने जूते पहने जा सकते थे११४।