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Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s19: चप्पल और पादुकाएं

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s19

Language
Hindi

चप्पल और पादुकाएं

c7.s19.1

जूतों के सिवाय गृहस्थ काठ की पादुकाएं तथा तालपत्र ओर बांस की बनी चप्पलें भी पहनते थे।१२२। पर इनका व्यवहार भिक्षुओं के लिए वर्जित था। चप्पलें तृण, मूंज, हिंताल की लकड़ी, कमल, बल्वज नाम की घास और कंबल की बनती थीं। आज दिन भी भारत के ऐसे इलाकों में जहां आधुनिक सभ्यता पूरी तरह से नहीं घुस सकी है, घास और मूंज की बनी चप्पलें काम में लायी जाती हैं।

c7.s19.2

१२२ महावग्ग, ५।७।१

c7.s19.3

कुछ शौकीन और पैसे वाले अपनी पादुकाएं सोने, चांदी, स्फटिक, वैडूर्य, कांसा, कांच, रांगा और तांबे के अलंकारों से सजाते थे।१२३ पर साधारण गृहस्थ ऐसा नहीं करते थे। भिक्षुओं को भी ऐसी अलंकृत पादुकाएं पहनने की आज्ञा नहीं थी ।

c7.s19.4

१२३ वही, ५।८।१