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Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s2.11

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s2.11

Language
Hindi

c7.s2.11

टीकाकार ने इसका अर्थ कपास का बना कपड़ा न करके सेमल की रुई (अर्कतूल) किया है। यह अर्थ संदेहात्मक है क्योंकि सेमल की रुई का सूत इतना कोमल होता है कि उसका बना कपड़ा एक धोब के बाद फट जाता है। लगता है यहां तूल से कपास का ही मतलब है। जातक कथाओं८ में तो कपास का बहुत उल्लेख हुआ है। तुंडिल जातक९ में बनारस के आसपास कपास के खेतों का वर्णन है। स्त्रियां कपास के खेतों की रखवारी करती थीं। महाजनक जातक१० में इन्हें कप्पास रक्खिका नाम से संबोधन किया गया है। कताई और बुनाई संबंधी उपकरणों के भी कभी कभी उल्लेख आते हैं। रुई धुनने की धनुही (कप्पास-पोथन-धनुके) का उल्लेख आता है११। स्त्रियों द्वारा महीन सूत कात कर (सुखुम सुत्तानि कन्तित्वा) गंडी (गुलं)१२ बनाने का भी उल्लेख है।