Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s21.8
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s21.8
- Language
- Hindi
c7.s21.8
जातकों में एक स्थान पर एक सूई बनाने वाले की कथा दी हुई है जिससे पता चलता है कि सूचिकार अपने व्यवसाय में काफी निपुण होते थे। कथा यह है१२८ कि बोधिसत्व एक सूचिकार के चोले में उत्पन्न हुए और उनकी इच्छा गांव के एक लुहार की कन्या से विवाह करने की हुई। उन्होंने बहुत ही अच्छे किस्म के लोहे से एक सूई बनाई जो इतनी हल्की थी कि पानी पर तैर सकती थी । इस सूई को उन्होंने एक कोश में (सत्थकोश) रक्खा और उस कोश को एक नाली में, और फिर इस नाली को एक पेटी में रख कर (ओवट्टिकायकरण्ड) वे लोहार के गांव में जाकर फेरी लगा कर आवाज देने लगे । "मेरी सूई सीधी और चिकनी है इसमें डोरा जल्दी पिरोया जा सकता है । कोरण्ड से इस पर पालिश की गयी है, इसकी नोक तेज है, सूई कौन लेगा।" "जल्दी पिरोई जाने वाली सीधी और मजबूत ठीक तरह से गोल की हुई मेरी सूई लोहे तक को छेद सकती है, बताओ मेरी सूई कौन लेगा।" लोहार की लड़की ने जब एक बाहरी को अपनी सूई को इस तरह प्रशंसा करते सुना तो उसे एक आदमी की मूर्खता पर इसलिए आश्चर्य हुआ कि उस लोहारों के गांव की सुइयां इतनी अच्छी बनती थीं कि चारों ओर से आदमी उन्हें खरीदने आते थे । लड़की ने बोधिसत्व को उत्तर दिया—