Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s12.2
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s12.2
- Language
- Hindi
c8.s12.2
ये वस्त्र ठीक नाप के, खुशनुमा रंग वाले और स्पर्श करने में मुलायम होते थे (प्रमाण रागस्पर्शाढ्यं)। उपरोक्त देशों से भेड़ के ऊन, पश्म (रांकव), रेशम (कीटज) और पट्ट (पट्टज) के बने कपड़े भी आये। यहां रांकव शब्द की व्याख्या आवश्यक है। कोशों में ७५ रंकु का अर्थ एक पशु विशेष मिलता है। लेकिन यह पशु कहां होता था इस संबंध की जानकारी कोशकारों को नहीं थी। खोज करने से पता चलता है 'रंकु' पामीर पर रहने वाले रंग नामके बकरे का संस्कृत रूप है। इसके पश्म से बहुत ही अच्छी चादरें बनती हैं ७६। महाभारत ७७ के एक और उल्लेख से पता चलता है रंकु के पश्म से नमदे भी (रांकवकट) बनते थे।