Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s4.10
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s4.10
- Language
- Hindi
c8.s4.10
(३) खंडसंघात्य२४—जुड़े हुए टुकड़ों पर बना शाल । टीका में दूसरी व्याख्या इस प्रकार की गयी है—खचितानां उतानां वा बहूनां खंडानां संघातेन निष्पादितम्—‘बिने हुए अथवा काढ़े हुए टुकड़ों को जोड़ कर बना हुआ शाल, खंडसंघात्य का यह वर्णन कश्मीरी पट्टीदार रूमालों के वर्णन से बहुत मिलता है । इस पद्धति में जब अलंकार करघे पर बिनने होते हैं तब कई १२ से १८ इंच चौड़े टुकड़े ले लिए जाते हैं और उन पर फूल पत्तियों की नक्काशियां बुन दी जाती हैं । इन पट्टियों को मनचाहे नाप में काट लेते हैं और फिर जोड़ कर एक पूरी नक्काशी का रूप दे देते हैं और रूमाल के बीच में इसे साट देते हैं। किनारे की पट्टियां रेशमी होती हैं जिनमें बहुधा एक ताना पश्मीने का होता है । ये पट्टियां भारी और मजबूत होती हैं। शाल की रफल बहुत बढ़िया पश्मीने की होती है। ये शाल अम्लीकार भी होते हैं। इसके लिए बढ़िया पश्मीने के टुकड़े नकशे के मुताबिक काट लिये जाते हैं और फिर इन पर बेल बूटे काढ़ दिये जाते हैं। अम्लीकार और तीलीकार शालों में इतनी समानता होती है कि इनमें से एक दूसरे को अलग करना कठिन होता है२५ ।