Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s9.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s9.5
- Language
- Hindi
c8.s9.5
कातने वालों का पारिश्रमिक उनके सूत की अच्छाई पर निर्भर होता था । जो कारीगर महीन सूत अच्छी तायदाद में कात सकते थे उन्हें तेल, हर्रें की टिकियां और अंजन आंख और दिमाग को तर रखने के लिए तथा दूसरों में काम करने के उत्साह को बढ़ाने के लिए दी जाती थीं । छुट्टी के दिनों में काम करने वाले कतकों को विशेष पारिश्रमिक मिलता था साथ ही साथ अच्छे साधन होते हुए भी उपयुक्त परिमाण में सूत न कातने वाले को पारिश्रमिक काट कर दंड भी दिया जाता था५७।