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Viyahapannatti 12.1.532

Viyāhapannatti: Hindi translation (Dīparatnasāgara, 2019) 12.1.532

Language
Hindi

12.1.532

गौतम स्वामी ने श्रमण भगवान महावीर स्वामी को वन्दन – नमस्कार किया और पूछा – भगवन्‌ ! जागरिका कितने प्रकार की है ? गौतम ! जागरिका तीन प्रकार की कही गई है, यथा – वृद्ध – जागरिका, अबुद्ध – जागरिका और सुदर्शन – जागरिका। भगवन्‌ ! किस हेतु से कहा जाता है ? गौतम ! जो उत्पन्न हुए केवलज्ञान – केवलदर्शन के धारक अरिहंत भगवान हैं, इत्यादि स्कन्दक – प्रकरण के अनुसार जो यावत्‌ सर्वज्ञ, सर्वदर्शी हैं, वे बुद्ध हैं, वे बुद्ध – जागरिका करते हैं, जो ये अनगार भगवंत ईर्यासमिति, भाषासमिति आदि पाँच समितियों और तीन गुप्तियों से युक्त यावत्‌ गुप्त ब्रह्मचारी हैं, वे अबुद्ध हैं। वे अबुद्ध – जागरिका करते हैं। जो ये श्रमणोपासक, जीव – अजीव आदि तत्त्वों के ज्ञाता यावत्‌ पौषधादि करते हैं, वे सुदर्शन – जागरिका करते हैं। इसी कारण से, हे गौतम ! तीन प्रकार की जागरिका यावत्‌ सुदर्शन – जागरिका कही गई है।

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