Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v1.c62.3
Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v1.c62.3
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- English
v1.c62.3
| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| (v) स्पर्शोचिता ,, | ,, | मयमते मानादिपरिखादिपुरस्सर-नगर-खेटादि— | |
| (vi) ऋतूचिता ,, | ,, | प्रभेदाः | १०८-११० |
| (vii) अप्रशास्ता भूमिः | ८७—६१ | **नगर-निवेशे च** | |
| ब—मृत्तिका-परीक्षा | ९१—६४ | १—मार्ग-विन्यासः | ११०-११२ |
| विभिन्ना प्रकाराः | ,, ,, | विश्वकर्म-दिशा— | |
| प्लवमुद्दिश्य भूमिसंज्ञाश्च | | पद्ममन्गरे प्रतोलीपुरस्सर- | |
| स—प्लव-परीक्षा | | राजवीथ्यादिवीथयः | ११० |
| टि० (१) तत्र ४४ तमे पृष्ठे दत्तास्ति | | सर्वतोभद्रे यथा | ,, |
| टि० (२) वास्तु-पूजन-बलिदान-हलकर्षणारोपणारोहणमांगलिक-प्रभृतीनि वास्तु-कृत्यानि तत्र भवन-खण्डे वक्ष्यमाणानीति नात्र निर्दिंष्टानि । | | प्रस्तरे यथा | ,, |
| | | चतुर्मुखे च यथेति दिक् | ,, |
| | | समरांगणदिशा— | |
| | | नगरस्य सप्तदश मार्गाः | |
| **द्वितीयः पटलः** | | तेषां संज्ञाः विन्यासाश्च | ११०-१११ |
| **ग्रामलक्षणं ग्राम-विन्यासश्च** | ६५-१०४ | मयमते नगर-विधाने मार्ग-संख्या | १११-११२ |
| विश्वकर्मीयाः— | | तत्रैव मार्ग-भेदेन दण्डकादि-पुर-भेदाः | ११२ |
| द्वादशग्रामाः | ९५ | मार्ग-चतुष्पथाः | ११२ |
| खेटादिवास्तुभूमिर्यथा | ६५-९६ | मार्गेषु जलभ्रमाः | ,, |
| मानसारीयं ग्राम-लक्षणं | ६६-६८ | २—नगर-निवेशे जातिवर्णाधिवासः | ११३-११६ |
| ततं एव नन्द्यावर्तस्य सविस्तरं लक्षणम् | ६८-१०२ | वि० वा०—दिशा | ११३ |
| मयमते ग्राम-प्रभेदाः | १०२-१०३ | स० सू०—दिशा | ११३-११४ |
| तत्रैव ग्राम-विन्यासश्च | ,, ,, | अ० पृ०—दिशा | ११४-११५ |
| शिल्प-लक्षणे— | | (क्रयविक्रययुतौकविन्यासः) | |
| वीथीः पुरस्कृत्य ग्राम-विन्यासभेदाः | १०३-१०४ | मयमते—अन्तरापणिकं यथा | ११५-११६ |
| **तृतीयः पटलः** | | ३—नगर-निवेशे देवतायतनानि | |
| **नगर लक्षणं नगर-निवेशश्च—** | १०५ १२४ | आरामोद्यानानि च | ११६—१२० |
| नगर-लक्षणं | | अ—देवगाराणि | |
| विश्वकर्म-वास्तु शास्त्रे— | | स० सू० | ११६-११८ |
| निगमादिनुपयोग्य-सप्तनगर-भेदाः | १०५ | अ० पृ० | ११८-११६ |
| तत्रैव सामान्यविंशति-नगर-प्रभेदाः | ,, | शिल्प० | ११९-१२० |
| समरांगणे नगरोपभेदाः | १०५-१०६ | ब—आरामोद्यानानानि | १२०-१२१ |
| समरांगणदिशा राष्ट्र-निवेश-पुरस्सरं एवं नगराणां निवेशः | १०६ | पादपारोपणस्य प्राचीना संस्था नगर-निवेशे तस्याः महन्महत्वम् | |
| अपराजितपृच्छायां— | | ४—नगर-निवेशे प्राकारादिविन्यासः | |
| विंशति-पुर-प्रभेदाः | ,, | (स०सू०) | १२१-१२३ |
| तेषां विशेषाश्च | १०६-७ | ५—नगर-निवेशे वर्ज्याः निवेशाः | १२३-१२४ |
| मानहारे नगर-भेदाः तेषां विशेषाश्च | १०७-१०८ | गर्हित-पुराणि तन्निवासफलञ्च | ,, |
Cites (6)
- Samarāṅgaṇasūtradhāra — Bhoja, Sanskrit
- Mānasāra — Sanskrit
- Mayamata — Maya, Sanskrit
- Viśvakarmavāstuśāstra — Sanskrit
- Aparājitapṛcchā — Bhuvanadeva, Sanskrit
- Śilparatna — Śrīkumāra (Śilparatna) 1500, Sanskrit