Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v1.c62.4
Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v1.c62.4
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- English
v1.c62.4
| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| (स० सू०) | १२३-१२४ | शिविर-वाहिनीमुख-स्थानीय-द्रोणक-सम्विद्धार्थक- | |
| छिन्नकर्णम् | ,, | कोलक-निगम-स्कन्धावारादयः | |
| विकर्णम् | ,, | पुनस्तत्रैव स्थित्यनुरूपे तेषां प्रभेदाः | |
| वज्राकृतिः | ,, | मयमते दुर्गभेदाः | १२८-१२९ |
| सूचीमुखं | ,, | तत्रैव दुर्गनिवेशस्य | ,, |
| वर्तुलम् | ,, | प्रकृष्टं प्रवचनम् | ,, |
| व्यजनाकारम् | ,, | शिल्परत्ने दुर्गभेदाः | १२९-३० |
| चापाकृतिधरम् | ,, | ग्राम-नगर-शोभायाम् | १३० |
| शकटद्विसमम् | ,, | ## तृतीयः खण्डः | |
| विस्तारद्विगुणायतम् | ,, | भवन-वास्तु | १३१-१७७ |
| विदिकूस्थम् | ,, | ## प्रथमः पटलः | |
| सर्पचक्रम् | ,, | प्रारम्भिकेषु | |
| (अ० पृ०) | १२४ | (अ) भूखननं हलकर्षणं | |
| सप्त दोषदाः पुरः | ,, | माङ्गलिकञ्च | १३१-१३४ |
| टि०—प्राचीन-पुर-निवेश-पद्धतौ राजहर्म्यादीनां | | (ब) गृहारम्भकाल-परीक्षणम् | १३४—१३६ |
| सभा-न्यायालय-वाजिाशाला-गजशाला-गोशाला- | | (स) कीलक-सूत्रपातादि-लक्षणम् | १३६-१४१ |
| चित्रशाला-पुस्तकालय-विद्याशालादीनां भवन- | | (द) बलिदान-विधि-लक्षणम् | १४१-१४२ |
| निवेश-स्यात्रैव प्रासंगिकत्व-मासीत्परं तस्य | | मण्डलकरणंकलशन्यसनञ्च | ,, |
| भवन-खण्डे वक्ष्यमाणत्वाद्न न दीयते । | | वास्तुदेवता-प्रकल्पन-पुरस्सरं | ,, |
| | | विश्वकर्मणः वास्तुदेवानाञ्च पूजा-विधिः | ,, |
| ## चतुर्थः पटलः | | स्थपत्यादीनां कर्मकाराणाञ्च पूजनादिकम् | ,, |
| दुर्ग-लक्षणं दुर्गनिवेशश्च | १२५—१३० | शान्तिबलिकर्माहाणि वास्त्वादीनि | ,, |
| दुर्गस्थापनम् | | शिलान्यास-लक्षणम् | १४२-१४५ |
| विश्वकर्म-वास्तु-शास्त्रे द्वादश दुर्गभेदाः | | विहितायनपक्ष-तिथिनक्षत्रादिः | १४२-१४३ |
| १—गिरिदुर्गम् | १२५ | प्रथमेष्टिका-लक्षणम् | १४३ |
| २—वनदुर्गम् | ,, | वर्जनीयाः शिलाः | १४३ |
| ३—जलदुर्गम् | ,, | नन्दादिकाश्चतस्रः शिलाः | ,, |
| ४—इरिणदुर्गम् | ,, | तद्देवताश्च | ,, |
| ५—दैवतदुर्गम् | १२६ | वेदीकल्पनम् | ,, |
| ६—८ एकमुख-द्विमुख-चतुर्मुखदुर्गाणि | ,, | नन्दाप्रतिष्ठापनविधिः | १४३-१४४ |
| ६—कूर्मदुर्गम् | ,, | उपशिलान्यासनम् | १४४ |
| १०—पारावतदुर्गम् | १२७ | शिलाङ्गाःप्रतिष्ठापनमन्त्रादिश्च | १४४—१४५ |
| ११—प्रभुदुर्गम् | ,, | द्रव्यसंग्रहणम् | |
| १२—युद्धदुर्गम् | ,, | (वि० वा०) | |
| समरांगणस्य दुर्गषट्कम् | १२७ | निर्माणद्रव्योपोद्घातः | |
| मानसारस्य दुर्गाष्टकम् | १२७-१२८ | द्रव्यं द्विविधम् | १४५ |
Cites (4)
- Samarāṅgaṇasūtradhāra — Bhoja, Sanskrit
- Mānasāra — Sanskrit
- Viśvakarmavāstuśāstra — Sanskrit
- Aparājitapṛcchā — Bhuvanadeva, Sanskrit