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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c10.28

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c10.28

Language
Hindi

c10.28

४ अशोक के लेखों की लिपि मामूली देखने वाले को अंग्रेज़ी या ग्रीक लिपि का भ्रम उत्पन्न करा दे ऐसी है. टॉम कोरिअट् नामक मुसाफिर ने अशोक के देहली के स्तंभ के लेख को देख कर ऍल. हिटकर को एक पत्र में लिखा कि 'मैं इस देश (हिंदुस्तान) के देली (देहली) नामक शहर में आया जहां पर 'अलेकज़ेंडर दी ग्रेट' (सिकंदर) ने हिंदुस्तान के राजा पोरस को हराया और अपनी विजय की यादगार में उसने एक बृहत् स्तंभ खड़ा करवाया जो अब तक वहां विद्यमान है' (केल्स वॉयेजिज़ ऐंड ट्रैवेल्स, जि. ६, पृ. ४२३; क; आ. स. रि; जि. १, पृ. १६३). इस तरह जब टॉम कोरिअट् ने अशोक के लेखवाले स्तंभ को बादशाह सिकंदर का खड़ा करवाया हुआ मान लिया तो उस पर के लेख के पढ़े न जाने तक दूसरे यूरोपियन यात्री आदि का उसकी लिपि को ग्रीक मान लेना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. पादरी एडवर्ड टेरी ने लिखा है कि टॉम कोरिअट ने मुझ से कहा कि मैंने देली (देहली) में ग्रीक लेख वाला एक बहुत बड़ा पाषाण का स्तंभ देखा जो 'अलेक्ज़ेंडर दी ग्रेट' ने उस प्रसिद्ध विजय की यादगार के निमित्त उस समय वहां पर खड़ा करवाया था' (क; आ. स. रि; जि. १, पृ. १६३-६४). इसी तरह दूसरे लेखकों ने उस लेख को ग्रीक लेख मान लिया था.

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