भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c10.30
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c10.30
- Language
- Hindi
c10.30
कर्नल जेम्स टॉड ने एक बड़ा संग्रह बाक्ट्रियन ग्रीक, शक, पार्थिअन और कुशनवंशी राजाओं के प्राचीन सिक्कों का किया था जिनकी एक ओर प्राचीन ग्रीक और दूसरी ओर खरोष्ठी अक्षरों के लेख थे. जनरल वॅंतुरा ने ई. स. १८३० में मानिकिआल के स्तूप को खुदवाया तो उसमें से कई एक सिक्के और दो लेख खरोष्ठी लिपि के३ मिले. इनके अतिरिक्त सर अलेकझाँडर बर्न्स आदि प्राचीन शोधकों ने भी बहुत से प्राचीन सिक्के एकत्र किये जिनके एक ओर के प्राचीन ग्रीक अक्षर तो पढ़े जाते थे परंतु दूसरी ओर के खरोष्ठी अक्षरों के पढ़ने के लिये कोई साधन न था. इन अक्षरों के लिये भिन्न भिन्न कल्पनाएं होने लगीं. ई. स. १८२४ में कर्नल जेम्स टॉड ने कड्फिसेस् के सिक्के पर के इन अक्षरों को ‘ससेनिअन’ प्रकट किया४. ई. स. १८३३ में ऍपॉलोडॉटस के सिक्के पर के इन्हीं अक्षरों को प्रिन्सेप ने पहलवी५ माना और एक दूसरे सिक्के पर की इसी लिपि६ को तथा मानिकिआल के लेख की लिपि को भी पाली७ (ब्राह्मी) बतलाया और उनकी आकृति टेढ़ी होने से यह अनुमान किया कि छापे और महाजनी लिपि के नागरी अक्षरों में जैसा अंतर८ है वैसा ही देहली आदि के अशोक के लेखों की पाली (ब्राह्मी) लिपि और इनकी लिपि में है, परंतु पीछे से स्वयं प्रिन्सेप को अपना अनुमान अयुक्त जंचने लगा.