भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.37
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.37
- Language
- Hindi
c11.37
३ ऋग्वेद में दो स्वरों के बीच के ‘ड’ का उच्चारण ‘ळ’ और वैसे ही आये हुए ‘ढ’ का उच्चारण ळ्ह होता है. इन दोनों के लिये भी पृथक् चिह्न हैं. ‘ळ’ का प्रचार राजपूताना, गुजरात, काठियावाड़ और सारे दक्षिण में अब भी है और उसका संकेत भी अलग ही है जो प्राचीन ‘ळ’ से ही निकला है. ‘ळ्ह’ को आज कल ‘ळ’ और ‘ह’ को मिला कर (ळ्ह) लिखते हैं, परंतु प्राचीन काल में उसके लिये भी कोई पृथक् चिह्न नियत होगा, क्योंकि प्राचीन तेलुगु-कनडी, ग्रंथ और तमिळ लिपियों के लेखों में ‘ळ’ के अतिरिक्त एक और ‘ऴ’ मिलता है; वैसा ही कोई चिह्न ‘ढ’ के स्थानापन्न ‘ळ्ह’ के लिये प्राचीन वैदिक पुस्तकों में होना चाहिये.
Linked texts (4)
- Aṣṭādhyāyī — Pāṇini, Sanskrit
- Ṛgvedasaṃhitā — Sanskrit
- Śuklayajurvedaprātiśākhya
- Mugdhabodha — Vopadeva, Sanskrit