भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.64
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.64
- Language
- Hindi
c11.64
इस लेख में बहुतेरे अक्षरों के एक से अधिक रूप मिलते हैं. संभव है कि कुछ तो उस समय भिन्न भिन्न रूप से लिखे जाते हों परंतु यह भी हो सकता है कि उक्त लेख का लेखक जैसे शुद्ध लिखना नहीं जानता था वैसे ही बहुत सुंदर अक्षर लिखनेवाला भी न था; क्योंकि इस लेख की लिपि वैसी सुंदर नहीं है जैसी कि अशोक के देहली के सवालक स्तंभ और पंडेरिया (रुंमिंदेई) के स्तंभ के लेखों की है, और जैसे उनमें अक्षर तथा स्वरों की मात्राओं के चिह्न एकसा मिलते हैं वैसे इस लेख में नहीं हैं. यह भी संभव है कि लेखक सिद्धहस्त न हो और त्वरा से लिखता हो जिससे अक्षर एकसा नहीं लिख सका. इसीसे कहीं सीधी खड़ी लकीर को तिरछा (देखो, उ, झ, न और प के दूसरे रूप) या गोलाईदार (देखो, ग और फ के दूसरे रूप) कर दिया है और कहीं गोलाईदार को तिरछा (देखो, ‘अ’ का चौथा रूप और ‘थ’ का तीसरा रूप) बना दिया है.