भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c13.33
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c13.33
- Language
- Hindi
c13.33
महानामन् के लेख में 'ऊ' को 'उ' के साथ [Figure:] चिह्न जोड़ कर बनाया है परंतु अन्यत्र बहुधा समकोणवाला नहीं किंतु गोलाईदार चिह्न मिलता है जिसका अग्रभाग नीचे की ओर झुका हुआ होता है (देखो, इसी लिपिपत्र में उष्णीषविजयधारणी के अंत की वर्णमाला का 'ऊ' और लिपिपत्र २४, २५, २८, ३१, ३४, ३५ में भी). 'त्' का रूप उपर्युक्त यशोधर्मन् के लेख (लिपिपत्र १८ में) के 'त्' का सा ही है परंतु इसमें सिर की आड़ी लकीर को दाहिनी ओर झुका कर बहुत नीचे बढ़ा लिया है संभव है कि नागरी का वर्तमान हलंत का चिह्न इसीसे निकला हो और व्यंजन के ऊपर लिखे जाने की अपेक्षा नीचे लिखा जाने लगा हो. 'र्थ', 'थ' से मिलता हुआ है और रेफ को पंक्ति से ऊपर नहीं किंतु सीध में लिखा है और 'र्थ' तथा 'थ' में भेद बतलाने के लिये ही 'थ' के नीचे के दाहिनी ओर के अंश को गोलाई के साथ ऊपर बढ़ाया है. ऐसा ही 'र्थ' अन्य लेखों में भी मिलता है (देखो, लिपिपत्र १७, २०, २१, २२, २८, २६).