भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s1.4
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.4
- Language
- Hindi
c25.s1.4
१ प्रसिद्ध पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. सर ऑरल स्टाइन ने अगाध परिश्रम के साथ तुर्कस्तान से जो अमूल्य प्राचीन सामग्री प्राप्त की है उसमें कुछ खरड़े ऐसे भी हैं जिन पर भारतवर्ष की गुप्तलिपि से निकली हुई तुर्कस्तान की ई. स. की छठी शताब्दी के आसपास की आर्य लिपि में स्वर, व्यंजन, स्वरों की १२ मात्राओं (ऋ ॠ और ऌ ॡ को छोड़ कर) की बारहखड़ी (द्वादशाक्षरी) तथा किसी में प्राचीन शैली के अंक भी दिये हुए हैं (ज. रॉ. ए. सो; ई. स. १६११, पृ. ४५२ और ४५८ के बीच के प्लेट १ से ४ तक). एक खरड़े में १ से १००० तक के वहां के प्रचलित प्राचीन शैली के चिह्नों के पीछे दो और चिह्न [Figure:] ऐसे हैं (ज. रॉ. ए. सो; ई. स. १६११, पृ. ४५५) जिनको प्रसिद्ध विद्वान् डॉ. होर्नले ने क्रमशः १०००० और १००००० के चिह्न माना है, परंतु हमको उन चिह्नों को १०००० और १००००० के सूचक मानने में शंका की है. संभव है कि इनमें से पहिला चिह्न १००००० का सूचक हो और दूसरा केवल समाप्ति (विराम) का चिह्न हो. उसको अंकसूचक चिह्न मानना संदिग्ध ही है.