भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s1.50
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.50
- Language
- Hindi
c25.s1.50
शिलालेख और दानपत्रों में ई. स. की छठी शताब्दी के अंत के आस पास तक तो केवल प्राचीन क्रम से ही अंक लिखे मिलते हैं. पहिले पहिल गूर्जरवंशी किसी राजा के ताम्रपत्र के दूसरे पत्रे में, जो [ कलचुरि ] संवत ३४६ ( ई. स. ५६५ ) का है, नवीन शैली से अंक दिये हुए मिलते हैं अर्थात् उसमें क्रमशः ३, ४ और ६ के अंक हैं. उक्त संवत् के पीछे कहीं प्राचीन शैली से और कहीं नवीन शैली से अंक लिखे जाने लगे और १० वीं शताब्दी के मध्य तक प्राचीन शैली का प्रचार कुछ कुछ रहा१; फिर तो उठ ही गया२ और नवीन शैली से ही अंक लिखे जाने लगे. उसके पीछे का केवल एक ही लेख ऐसा मिला है, जो नेपाल के मानदेव के समय का [ नेवार ] सं. २५६ ( ई. स. ११३६ ) का है और जिसमें अंक प्राचीन शैली से दिये हैं३.