भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s1.51
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.51
- Language
- Hindi
c25.s1.51
भारतवर्ष में अंकों की यह प्राचीन शैली कब से प्रचलित हुई इसका पता नहीं चलता परंतु अशोक के सिद्धापुर, सहस्राम और रूपनाथ के लेखों में इस शैली के २००, ५० और ६ के अंक मिलते हैं जिनमें से २०० का अंक४ तीनों लेखों में बिलकुल ही भिन्न प्रकार का है और ५० तथा ६ के दो दो प्रकार के रूप मिलते हैं. २०० के भिन्न भिन्न तीन रूपों से यही कहा जा सकता है कि ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी में तो अंकों की यह शैली कोई नवीन बात नहीं किंतु सुदीर्घ काल से चली आती रही होगी. यदि ऐसा न होता तो अशोक के लेखों में २०० के अंक के एक दूसरे से बिलकुल ही भिन्न तीन रूप सर्वथा न मिलते. अशोक से पूर्व उक्त अंकों के चिह्न कैसे थे और किन किन परिवर्तनों के बाद वे उन रूपों में परिणत हुए इस विषय में कहने के लिये अब तक कोई साधन उपलब्ध नहीं हुआ.