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भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.7

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.7

Language
Hindi

c25.s1.7

उपर्युक्त प्राचीन अंकों के चिह्नों में से १, २, और ३ के चिह्न तो क्रमशः -, = और ≡ आड़ी लकीरें हैं जो अब तक व्यापारियों की बहियों में रुपयों के साथ आने लिखने में एक, दो और तीन के लिये व्यवहार में आती हैं. पीछे से इन लकीरों में वक्रता आने लगी जिससे १ की लकीर से वर्तमान नागरी आदि का १ बना, और २ तथा ३ की वक्र रेखाओं के परस्पर मिल जाने से वर्तमान नागरी आदि के २ और ३ के अंक बने हैं. बाकी के चिह्नों में से कितने एक अक्षरों से प्रतीत होते हैं और जैसे समय के साथ अक्षरों में परिवर्तन होता गया वैसे ही उनमें भी परिवर्तन होता रहा. प्राचीन शिलालेख और दानपत्रों में ४ से १००० तक के चिह्नों के, अक्षरों से मिलते हुए, रूप नीचे लिखे अनुसार पाये जाते हैं—