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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s2.17

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s2.17

Language
Hindi

c25.s2.17

१ पहिले ६ अक्षरों से १ से ६ तक के अंक, उनके बाद के ६ अक्षरों से १० से ६० तक की दहाइयों के अंक और बाकी के अक्षरों से १००, २०० आदि के अंक बतलाये जाते थे. जब वर्णमाला के अक्षर पूरे हो जाते तब फिर उन्हींके ऊपर चिह्न लगा कर १००० तक सूचित करने के लिये उनको काम में लाते थे. ग्रीक लोगों में १०००० तक के लिये अक्षर संकेत थे परंतु रोमन लोगों में १००० तक के ही. रोमन अक्षरों से अंक लिखने का प्रचार अब तक युरोप में कुछ कुछ बना हुआ है और बहुधा घड़ियों में घंटों के अंकों और पुस्तकों में कभी कभी सन् के अंक तथा सेटों की संख्या आदि में उसका व्यवहार होता है. अरबों में भारतीय अंक ग्रहण करने के पहिले अक्षरों से ही अंक बतलाये जाते थे, जिसको 'अबजद' (हिब्रू वर्णमाला के पहिले ४ अक्षरों के उच्चारणों-अ, ब, ज और द-से) कहते हैं. उन्होंने यह अक्षरसंकेत ग्रीकों से सीखा था. अरबी से फ़ारसी में उसका प्रयोग होने लगा और हिंदुस्तान के मुसलमानों के समय के फ़ारसी लेखों तथा पुस्तकों में कभी कभी अंकसूचक अक्षरों से शब्द बना कर सन् का अंक बतलाया हुआ मिलता है, जैसे कि 'वफ़ात् फीरोज़ (फ़ीरोज़ का देहांत) = हिजरी सन् ७६०; 'मस्जिद जामिउल् शर्क = हिजरी सन् ८५२ आदि (क; ई. इं; पृ. २२६).