भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s2.16
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s2.16
- Language
- Hindi
c25.s2.16
शून्य की योजना कर नव अंकों से गणित शास्त्र को सरल करनेवाले नवीन शैली के अंकों का प्रचार पहिलेपहल किस विद्वान् ने किया इसका कुछ भी पता नहीं चलता. केवल यही पाया जाता है कि नवीन शैली के अंकों की सृष्टि भारतवर्ष में हुई. फिर यहां से अरबों ने यह क्रम सीखा और अरबों से उसका प्रवेश युरोप में हुआ, जिसके पहिले चाल्डिअन्, हिब्रू, ग्रीक, अरब आदि एशिया और युरोप की जातियां वर्णमाला के अक्षरों१ से अंकों का काम लेती थीं. अरबों के यहां खलिफ़ वलीद के समय (ई. स. ७०५-७१५) तक अंकों का प्रचार न था२ जिसके बाद उन्होंने भारतवासियों से अंक लिये.