भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s2.25
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s2.25
- Language
- Hindi
c25.s2.25
अलबेरूनी का, जो अरबों तथा हिंदुओं के ज्योतिष और गणितशास्त्र का अपूर्व ज्ञाता था और जिसने कई बरस तक हिंदुस्तान में रहकर संस्कृत पढ़ा था इतना ही नहीं किंतु जो संस्कृत में अनुष्टुभ् छंद भी बना लेता था और जिसको इस देश का व्यक्तिगत अनुभव था, यह कथन कि 'जिन अंकों को हम काम में लाते हैं वे हिंदुओं के सब से सुंदर अंकों से लिये गये हैं,' मि. के के विचार में ठीक न जचा परंतु १५ वीं शताब्दी के आसपास के शब्दव्युत्पत्तिशास्त्र के ज्ञाता फ़ीरोज़ अबदी का, जो गणितशास्त्र का ज्ञाता न था, 'हिंदसह' शब्द की उत्पत्ति 'अंदाज़ह' शब्द से बतलाना ठीक जच गया जिसका कारण यही है कि पहिले का लेख मि. के के विरुद्ध और दूसरे का अनुकूल था. 'एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका' नामक महान् अंग्रेज़ी विश्वकोष की १७ वीं जिल्द के ६२६ वें पृष्ठ पर नानाघाट के लेख के, भारतीय गुफ़ाओं के लेखों के और १० वीं शताब्दी के नागरी के अंक दिये हैं और उनके नीचे ही शीराज़ में लिखी हुई १० वीं शताब्दी की एक अरबी पुस्तक के भी अंक दिये हैं जो वस्तुतः प्राचीन नागरी ही हैं; उनमें केवल ४ के अंक को टेढ़ा और ७ को उलटा लिखा है बाक़ी कोई अंतर नहीं है. अरबी, फ़ारसी और उर्दू तक के अंक, उन लिपियों की लेखनशैली तथा सेमेटिक अंकों के अनुसार दाहिनी ओर से बाईं ओर न लिखे जा कर हिंदू रीति से ही बाईं ओर से दाहिनी ओर अब तक लिखे जाते हैं. ऐसी दशा में अलबेरूनी और मि. के में से किसका कथन यथार्थ है यह पाठक लोग स्वयं जान सकेंगे.