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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s2.24

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s2.24

Language
Hindi

c25.s2.24

है कि 'हिंदूलोग अपनी वर्णमाला के अक्षरों को अंकों के स्थान में काम में नहीं लाते जैसे कि हम हिब्रू वर्णमाला के क्रम से अरबी अक्षरों को काम में लाते हैं. हिंदुस्तान के अलग अलग हिस्सों में जैसे अक्षरों की आकृतियां भिन्न हैं वैसे ही संख्यासूचक चिह्नों की भी, जिनको अंक कहते हैं, भिन्न हैं. जिन अंकों को हम काम में लाते हैं वे हिंदुओं के सब से सुंदर अंकों से लिये गये हैं.…जिन भिन्न भिन्न जातियों से मेरा संपर्क रहा उन सबकी भाषाओं के संख्यासूचक क्रम के नामों (इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि) का मैंने अध्ययन किया है जिससे मालूम हुआ कि कोई जाति हज़ार से आगे नहीं जानती. अरब लोग भी हज़ार तक [नाम] जानते हैं…इस विषय में मैंने एक अलग पुस्तक लिखा है. अपने अंकक्रम में जो हज़ार से अधिक जानते हैं वे हिंदू हैं. …वे संख्यासूचक क्रम को १८ वें स्थान तक ले जाते हैं…जिसको 'परार्द्ध' कहते हैं. ……अंकगणित में हिंदू लोग अंकों का उसी तरह प्रयोग करते हैं जैसे कि हम करते हैं. मैंने एक पुस्तक लिख कर यह बतलाया है कि इस विषय में हिंदू हमसे कितने आगे बढ़े हुए हैं'१.