भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c27.10
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c27.10
- Language
- Hindi
c27.10
जुलते हैं. बाकी के अक्षरों में जो अंतर है वह विशेष कर त्वरा से तथा चलती कलम से पूरा अक्षर लिखने से ही हुआ है. 'ख' के स्थान में 'ष' लिखा जाता है. जंबू तथा पंजाब के सारे उत्तरी पहाड़ी प्रदेश में (शायद शिमले ज़िले को छोड़कर१) इसका प्रचार है और यह भिन्न भिन्न विभागों में कुछ कुछ भिन्नता से लिखी जाती है. जो जंबू के इलाके में प्रचलित है उसको 'डोगरी' और जो चंबा राज्य में लिखी जाती है उसको 'चमियाली' कहते हैं. जब महाजन आदि मामूली पढ़े हुए लोग, जिनको स्वरों की मात्रा तथा उनके ह्रस्व दीर्घ का ज्ञान नहीं होता, इसको लिखते हैं तब कभी कभी स्वरों की मात्राएं या तो नहीं लगाई जातीं या उनके स्थान पर मूल स्वर भी लिख दिये जाते हैं. इसीसे टाकरी का पढ़ना बाहरवालों के लिये बहुत कठिन होता है और जो शिलालेख इस समय उसमें खोदे जाते हैं उनका पढ़ना भी बहुधा कठिन होता है. 'टाकरी' नाम की उत्पत्ति का ठीक पता नहीं चलता परंतु संभव है कि 'ठाकुरी' (ठक्कुरी) शब्द से उसकी उत्पत्ति हो अर्थात् राजपूत ठाकुरों (ठक्कुरों) की लिपि; अथवा टांक (तवाण) जाति के व्योपारियों की लिपि होने के कारण इसका नाम टाकरी हुआ हो.